: बिना उपकार के नहीं चल सकता किसी का जीवन : श्री प्रकाश मुनिजी म.सा
Wed, Apr 26, 2023
रतलाम 26 अप्रैल।
किसी के द्वार पर यदि भिखारी आता है, तो वह उसपर उपकार ही करता है। गाय, कुत्ता और समस्त प्रकार जीव यही उपकार करते है। इनके आने से जीवन में करूणा के भाव जागृत होते है। करूणा के भावों का आत्मा के निज भाव जागृत करने में सबसे बडा उपकार होता है। करूणा के भाव को कमजोर नहीं समझे, वे हमे केवल ज्ञान अर्थात परमात्म तत्व की प्राप्ति तक ले जा सकते है।
यह बात श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा ने कही। नोलाईपुरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में प्रवचन देते हुए उन्होंने मैं कितना कृतज्ञ हूं विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रवर्तकश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन की विडंबना है कि हमे लगता है कि किसी की मदद कर हम उस पर उपकार कर रहे है, जबकि उपकार तो मदद लेने वाला करता है। दुनिया के सभी जीव और अजीव साधन उपकारी है, क्योंकि किसी ना किसी रूप में वे हमारी मदद ही करते है। हमारा जीवन बिना उपकार के नहीं चल सकता।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि किसी को कुछ देने में करूणा के जो भाव जागृत होते है, वे त्याग की बुद्धि जगाने, वस्तु के प्रति ममत्व कम करने और परिग्रह कम करने के साथ-साथ हमे पुण्य के रास्ते पर ले जाने में सहायक होते है। इन भावों से व्यक्ति मन, वचन, काया सभी के पुण्य करता है । उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में अनंत जीवों का उपकार होता है। उनके बिना हम जी नहीं सकते। एक-दूसरे का सहयोग सबकों लेना ही पडता है। इसलिए अकेले कुछ कर लेने के भ्रम में नहीं रहना चाहिए। उपकारी का उपकार मानने का भाव रखेंगे, तभी आत्मा का विकास होगा और हम परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर पाएंगे।
प्रवचन में पंडित रत्न श्री महेन्द्र मुनिजी मसा, श्री दर्शनमुनिजी मसा, श्री अभिनंदन मुनि जी मसा और महासती श्री चंदनबाला जी मसा, श्री रमणीक कुंवर रंजन जी मसा, श्री कल्पनाश्रीजी मसा, श्री चंदना जी मसा, श्री लाभोदया जी मसा, श्री जिज्ञासा जी मसा आदि ठाणा उपस्थित रहे। संचालन सौरभ मूणत ने किया। अंत में प्रभावना का वितरण श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट द्वारा किया गया।
: यदि मन की बिगडेगी प्रकृति, तो निश्चित आएगी विकृति : प्रकाशमुनिजी म.सा
Wed, Apr 26, 2023
रतलाम 25 अप्रैल।
आजकल लोग कहते है कि प्रकृति बिगड गई है। कभी भी गर्मी हो जाती है, कभी भी बारिश हो जाती है, लेकिन इसमें प्रकृति का दोष नहीं है। हमारी आत्मा की प्रकृति बिगडी, तो संसार की प्रकृति बिगडी है। व्यक्ति को उसका मन जिस दिशा में ले जाता है, वह वैसा ही सोचने और करने लगता है। मन की प्रकृति बिगडती है, तभी विकृति आएगी।
यह बात श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा ने नोलाइपुरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में व्याख्यान के दौरान कही। अनुचित पथ विषय पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति में आए बदलावांे के लिए मनुष्य स्वयं ही दोषी है। यदि हम प्रकृति रहते, तो प्रकृति सदैव हमारे साथ रहती, लेकिन व्यक्ति अपने मन के अधीन हो गया। इससे मन जो कहता है, वही उसे करना होता है और इससे विकृतियां बढती जा रही है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आत्मा की प्रकृति में जीना चाहिए, क्योंकि प्रकृति में जीने वाला कभी दुखी नहीं होता, वह सदैव प्रसन्न रहता है। सब यह विचार करे कि सडक पर करोडों की गाडी में जाने वाला अधिक प्रसन्न है अथवा पैदल विहार करने वाले संतों की प्रसन्नता अधिक है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि संतों का चित्त प्रकृति के साथ रहता है, जबकि अन्य लोगों का चित्त मन और व्यक्ति के अधीन है। संसार में हमेशा शरीर ही थकता है, मन कभी नहीं थकता। यदि हमारे चित्त की प्रसन्नता हमारे हाथ में नहीं है, तो उसके लिए हम स्वयं दोषी है। हमने अपने मन को दूसरों अधीन कर दिया हैं प्रवर्तकश्री ने प्रसन्न रहने के लिए प्रकृति के साथ चलने का आव्हान किया। आरंभ में महासती श्री रमणीक कुंवर रंजन की मसा ने विचार रखे। इस दौरान पंडित रत्न श्री महेन्द्र मुनिजी मसा, श्री दर्शनमुनिजी मसा, श्री अभिनंदन मुनि जी मसा,एवं महासती श्री चंदनबाला जी मसा, श्री कल्पनाश्रीजी मसा, श्री चंदना जी मसा, श्री लाभोदया जी मसा, श्री जिज्ञासा जी मसा आदि ठाणा उपस्थित रहे। संचालन रखब चत्तर ने किया। प्रभावना का वितरण चंदनमल, राजमल मूणत परिवार द्वारा किया गया।
अभिग्रहधारी और उग्रविहारी का विहार
: वर्षीतप पारणा महोत्सव संपन्न होने के बाद अभिग्रहधारी एवं उग्र विहारी श्री राजेशमुनिजी मसा ने सेवाभावी श्री राजेन्द्रमुनिजी मसा के साथ मंगलवार सुबह रतलाम से विहार कर दिया। वे उग्र विहार करते हुए बिलपांक तक पहुंच गए। गुरूभक्तों ने जय-जयकार करते हुए उन्हें बिदाई दी।
: योगी व्यक्ति समाज व राष्ट्र के लिए हितकारी होता है : डा वेदप्रकाश शर्मा
Mon, Apr 24, 2023
रतलाम l पतंजलि युवा भारत मध्य प्रदेश के तत्वाधान में रतलाम में चल रहे 25 दिवसीय योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर में मध्यप्रदेश के योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा द्वारा उपस्थित जनों को योग के मूलभूत सिद्धांतों के बारे में बताया गया श्री शर्मा द्वारा नशा मुक्ति अभियान में योग की महत्ता बताई गई साथ ही उन्होंने कहा कि जो यहां से प्रशिक्षण लेकर जा रहा है। सभी साधन अपने गांव मोहल्ले वार्ड में योग कक्षा अनिवार्य रूप से संचालित करे, नशा मुक्त ,हिंसा मुक्त भारत का निर्माण योग से ही होगा । श्री शर्मा द्वारा पतंजलि योगपीठ द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण की सराहना की गई साथ ही योग आयोग में युवा कैसे रोजगार प्राप्त कर सकते हैं उस पर विशेष प्रकार डाला गया ,आदर्श योग शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया।
विशेष अतिथि इंडियन योग एसोसिएशन कि प्रदेश प्रभारी पुष्पांजलि शर्मा द्वारा भी उपस्थित साधकों को प्रशिक्षण दिया गया। युवा भारत राज्य प्रभारी प्रेम पूनिया, प्रदेश कार्य करिणी सदस्य महेश कुमावत, उत्तम शर्मा ,विशाल कुमार वर्मा,डॉ प्रदीप जैन अध्यक्ष महावीर इंटरकांटिनेंटल रतलाम ,चंदनमल घोंटा आयुर्वेदाचार्य आरोग्य धाम, जयश्री राठौड़, निर्मला उपाध्याय अपार उपाध्याय सीमा वर्मा, प्रकाश चंद बिलाला, राम बाबू यादव, राजमल कुमावत जिला खेल अधिकारी ,आरसी तिवारी जिला आयुष अधिकारी बलराज चौहान, खुशाल सिंह जिला पर्यावरणविद, पुलिस विभाग खिलवान सिंह से एवं अन्य संगठनों के योग शिक्षक योग कार्यकर्ता व सैकड़ों योग साधक उपस्थित रहे।